निवेशकों को 150% डिविडेंड देगी देश की सबसे बड़ी NBFC, आपको भी चाहिए इसका फायदा तो पढ़ें पूरी डिटेल

Shriram Finance Dividend: कंपनी ने कारोबारी साल 2022-23 के लिए 150% अंतरिम डिविडेंड देने का ऐलान किया है. कंपनी ने शनिवार को बोर्ड बैठक के बाद दोनों एक्सचेंज को इस बारे में जानकारी दी. 10 रुपये प्रति शेयर के फेस वैल्यू पर निवेशकों को ये डिविडेंड दिए जाएंगे.

देश की सबसे बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) Shriram Finance ने कारोबारी साल 2022-23 के लिए 150% अंतरिम डिविडेंड का ऐलान किया है. कंपनी ने बताया कि 10 रुपये प्रति शेयर के फेस वैल्यू का ये डिविडेंड 15 रुपये प्रति शेयर के भाव पर होगा. 30 सितंबर तक के आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण भारत तक इस कंपनी की अच्छी खासी पहुंच है. देशभर में कंपनी के पास कुल 67 लाख से ज्यादा प्राइवेट और कॉरपोरेट ग्राहक हैं.

कंपनी ने शनिवार को स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा, "24 दिसंबर को हुए बैठक में बोर्ड ने 10 रुपए प्रति शेयर फेस वैल्यू पर 150% यानी 15 रुपये प्रति शेयर के भाव पर अंतरिम डिविडेंड का फैसला लिया है. डिविडेंड की रिकॉर्ड तारीख 4 जनवरी 2022 (बुधवार) होगी. 18 जनवरी को योग्य शेयरहोल्डर्स के लिए अंतरिम डिविडेंड की पेआउट तारीख होगी."

भारत की इस सबसे बड़ी NBFC ने 23 दिसंबर (शुक्रवार) को जानकारी दी थी कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में कंपनी की कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) करीब 33,000 करोड़ रुपये पर पहुंच चुकी है. कंपनी ने एक्सचेंज को इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि कमर्शियल वाहनों, MSMEs और टू-व्हीलर फाइनेंसिंग की बढ़ती डिमांड की वजह से उसे फायदा मिला है. इन दोनों राज्यों में कंपनी से 498 ब्रांच के जरिए करीब 13.5 लाख ग्राहक और 10,000 से ज्यादा कर्मचारी जुड़े हैं. दोनों राज्यों में करीब 2,930 करोड़ रुपए के साथ सबसे बड़ी डिपॉजिट फ्रेंजाइजी है. यहां कुल डिपॉजिटर्स की संख्या 46,000 से ज्यादा है.

कंपनी अब आगे ग्रोथ के लिए स्वरोजगार और MSME इकोनॉमी पर फोकस बढ़ा रही है. कंपनी की नेटवर्थ 37,500 निवेशकों को क्या जानना चाहिए करोड़ रुपये है. जबकि कुल AUM करीब 1.71 लाख करोड़ रुपये हैं. देशभर में कंपनी के 67 लाख से ज्यादा ग्राहक हैं. तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में ग्रोथ की रणनीति पर बात करते हुए कंपनी ने कहा कि कंपनी इस क्षेत्र में 5 प्रोडक्ट्स पर सबसे ज्यादा फोकस कर रही है. ये प्रोडक्ट्स कमर्शियल वाहन, MSMEs, टू-व्हीलर, गोल्ड लोन और पर्सनल लोन हैं. कंपनी अब उन जगहों और लोगों तक पहुंच बना रही है, जहां अभी तक बैंकिंग या दूसरी वित्तीय सुविधाएं नहीं पहुंची है.

इन दोनों राज्यों पर बात करते हुए MD & CEO वाई एस चक्रवर्ती ने कहा कि Shriram Finance आम आदमी के लिए है और दोनों राज्यों में हमारी रणनीति स्वरोजगार MSME जैसे छोटे कारोबारियों पर हम फोकस कर रहे हैं. MSME को ही कर्ज की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. उन्हें इसका दुष्प्रभाव भी झेलना पड़ता है. वहीं कंपनी के जॉइंड MD के श्रीनिवास ने कहा कि ये दोनों राज्य कंपनी की टॉप 5 सबसे ज्यादा वरीयता वाले राज्यों में है. MSME को कर्ज निवेशकों को क्या जानना चाहिए मुहैया कराने पर हमारा सबसे ज्यादा फोकस होगा.

MF की फैक्ट शीट की क्या है अहमियत, निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है इस पर गौर करना

म्यूचुअल फंड की फैक्ट शीट में निवेशक के काम आने वाली कई प्रकार की जरूरी जानकारी होती हैं, जिसे पढने से आपको फंड चुनने में मदद मिलती हैं.

  • Vijay Parmar
  • Publish Date - September 6, 2021 / 06:48 PM IST

MF की फैक्ट शीट की क्या है अहमियत, निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है इस पर गौर करना

unsplash - आपको फैक्ट शीट में कुछ अहम रेश्यो, रिस्कोमीटर, एक्स्पेंस रेशियो, एग्जिट लोड जैसी चीजें देखनी चाहिए.

Mutual Fund Fact Sheet: म्यूचुअल फंड फैक्टशीट एक दस्तावेज है, जिसमें फंड की सारी जानकारी दी जाती हैं. आपको निवेश करने से पहले फंड के बारे में सारी जानकारी हासिल करनी चाहिए और इसके लिए सेबी ने सभी फंड हाउस को फैक्ट शीट जारी करने का आदेश दिया हुआ है. सभी फंड की फैक्ट शीट में समानता रखने का भी आदेश दिया गया है, ताकि निवेशक को विभिन्न फंड की फैक्ट शीट में आसानी हो सके. इस शीट में निवेशक के काम आने वाली कई प्रकार की जरूरी जानकारी होती हैं, जिसे पढ़ने से आपको फंड चुनने में मदद मिलती है. यदि आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं तो आपको फंड को अच्छी तरह से जानना जरूरी है. आख बंद करके और किसी की सिफारिश सुनकर निवेश नहीं करना चाहिए.

क्या होता हैं फैक्ट शीट में?

– किसी भी म्यूचुअल फंड की फैक्टशीट में उसका निवेश करने का उद्देश्य लिखा होता हैं. फंड की कैटेगरी (लार्ज, स्मौल, मिड, मल्टि-कैप, फ्लेक्सि-कैप इत्यादि), स्कीम की नेट एसेट वैल्यू (NAV), प्लान के विकल्प (डायरेक्ट, ग्रोथ या डिविडेंड) भी इसमें लिखे होते हैं.
– इसके अलावा फंड कितने प्रकार के खर्च करता हैं और उसे फंड का प्रबंधन करने के लिए कितनी लागत उठानी पडती हैं वह लिखा होता हैं.
– फंड हाउस का कुल एसेट अंडर मेनेजमेन्ट (AUM) कितना हैं, उसका टोटल एक्सपेंस रेश्यो (TER) कितना है, फंड मैनेजर कौन हैं, उसका अगला रिकॉर्ड कैसा है वगैरह जानकारी इस पत्रक में शामिल की जाती हैं.
– फंड के इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो में किस तरह के एसेट, शेयर, बॉन्ड इत्यादि शामिल हैं उसकी जानकारी होती है.
– फंड का बैन्चमार्क (निफ्टी50, निफ्टी मिडकैप 150, निफ्टी 200 TRI वगैरह), एग्जिट लॉड, न्यूनतम निवेश जैसी जानकारी को फैक्टशीट में शामिल किया जाता है.

आपके लिए क्यों है जरूरी फैक्ट शीट?

मान लीजिए, आपने किसी लक्ष्य के लिए म्यूचुअल फंड में निवेश करने का फैसला किया है तो आपका फंड आपके लक्ष्यों के मुताबिक निवेश करता है या नहीं इसका पता उसकी फैक्ट शीट से चल सकता है. आपकी जोखिम लेने की क्षमता के अनुसार यह फंड निवेश करता है या नहीं उसका पता भी आपको फैक्टशीट से चलता है. आप यदि किसी फंड को चुनते है तो क्या उससे आपका टार्गेट हासिल होगा या नहीं यह पता करने में भी फैक्ट शीट आपकी मदद कर सकती है.

रिस्कोमीटर को देखें

रिस्कोमीटर से आपको फंड कितना रिस्की है यह पता चलता हैं. इसे पांच कैटेगरी में विभाजित किया जाता है – कम जोखिम, मध्यम जोखिम, मध्यम, मध्यम से अधिक और सबसे अधिक जोखिम वाली कैटेगरी.

फंड की वोलैटिलिटी बताएगी फैक्ट शीट

स्टैंडर्ड डेविएशन से आपको फंड कितना वोलेटाइल है यह पता करने में मदद मिलती है. यह रेशियो एक स्टैस्टिकल मेजरमेंट है. आपके फंड का स्टैंडर्ड डेविएशन जितना अधिक होगा, कीमत में भी उतना ज्यादा फर्क दिखेगा. जैसे वोलेटाइल स्टॉक में ज्यादा स्टैंडर्ड डेविएशन होता हैं, वहीं स्थिर ब्लूचिप स्टॉक का डेविएशन आम तौर पर कम पाया जाता है.

फंड का प्रदर्शन बताएगी फैक्ट शीट

किसी भी फंड की फैक्टशीट में आपको कुछ अहम रेश्यो को देखना चाहिए, जिसमें एक है शार्प रेश्यो. यह रेश्यो म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन मापने का एक मानक हैं. ज्यादा शार्प रेश्यो का मतलब है ज्यादा जोखिम के बिना ज्यादा रिटर्न. शार्प रेश्यो रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न का अनुमान लगाने का अच्छा तरीका माना जाता हैं. निवेशकों को हमेशा शार्प रेश्यो को दर्शाने वाला फंड चुनना चाहिए. फंड का पोर्टफॉलियो टर्नओवर रेशियो जितना कम होगा उतना वह फंड अच्छा माना जाता हैं.

आपको फैक्ट शीट में क्या देखना चाहिए?

फैक्ट शीट में कई अहम चीजें होती हैं, जिसके बारे में आपको जानना बेहद आवश्यक है. आपको किसी भी फंड की फैक्ट शीट में उसकी कैटेगरी, फंड मैनेजर की प्रोफाइल, फंड मैनेजर का ट्रैक रिकॉर्ड, फंड का बेंचमार्क इत्यादि को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए. इनके अलावा फंड कितने साल पुराना है ये जानकारी भी देखनी चाहिए क्योंकि आमतौर पर 3 साल पुराने फंड में निवेश करना बेहतर माना जाता है. आपको फैक्ट शीट में शामिल स्टैंडर्ड डेविएशन, बीटा, शार्प, आर-स्कॉयर जैसे अहम रेशियो को भी देख लेना चाहिए.

Investment Portfolio: अपने निवेश पोर्टफोलियो में शामिल करें ये तीन चीजें, बाजार के उतार-चढ़ाव में भी होगा मुनाफा

Investment Strategy: भारत ही नहीं, दुनिया भर के शेयर बाजारों में लगभग एक साल से उतार-चढ़ाव का दौर जारी है. ऐसे में आपकी निवेश नीति क्‍या हो जो लॉन्‍ग टर्म में फायदा दे, आइए विस्‍तार से जानते हैं.

By: ABP Live | Updated at : 14 Nov 2022 12:58 PM (IST)

अस्थिर बाजार में निवेश की रणनीति

इस साल की शुरुआत से ही ग्‍लोबल और भारतीय बाजार (Indian Equity Market) में अस्थिरता देखी जा रही है. महंगाई में होती लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने ब्‍याज दरों में अच्‍छा-खासा इजाफा किया है और इसे नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, अगर आप विदेशी बाजारों से तुलना करेंगे तो पाएंगे भारत की अर्थव्‍यवस्‍था (Indian Economy) तुलनात्‍मक रूप से ज्‍यादा स्थिर है. दूसरे उभरती अर्थव्‍यवस्‍थाओं (Emerging Economies) के मुकाबले भारतीय बाजार का प्रदर्शन एक या पांच साल में बेहतर रहा है. इक्विटी वैल्‍यूएशन की बात करें तो भारत का लॉन्‍ग टर्म एवरेज भी दूसरे बाजारों की तुलना में अच्‍छा रहा है. हालांकि, इन सब के बावजूद रिस्‍क के प्रति सचते रहने की जरूरत है क्‍योंकि मार्केट वैल्‍यूएशन सस्‍ता नहीं है.

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के एमडी और सीईओ निमेश शाह कहते हैं कि दुनिया भर के बाजार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और इस लिहाज से अगर दुनिया में कोई समस्या आती है तो भारत में भी शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए सफर निवेशकों को क्या जानना चाहिए इतना आसान भी नहीं हो सकता है. हमारा मानना है कि जब यूएस फेड यह घोषणा करता है कि मुद्रा को सख्ती से साथ निपटा जा चुका है तो यह इक्विटी के लिए एक बड़े असेट क्लास के रूप में उभरने का बड़ा मौका होगा. हमें नहीं पता कि ऐसा कब होगा और तब तक हम उम्मीद करते हैं कि मार्केट में उतार-चढ़ाव बना रहेगा.

शाह ने कहा कि विकसित अर्थव्‍यवस्‍थाओं (Developed Economies) के आर्थिक मंदी या सुस्‍ती (Recession) के दौर से गुजरने के बावजूद भारत पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा. वास्तव में विश्‍व के विकसित देशों में आने वाली मंदी (developed world recession) भारत की कुछ चुनौतियों को कम कर सकती है. उदाहरण के तौर पर तेल की ऊंची कीमतें, चालू खाता घाटे को लेकर होनी वाली चिंताएं और महगाई के मोर्चे पर हमे फायदा भी हो सकता है. शेयर बाजार में अगर गिरावट भी आती है तो हमें ज्‍यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है. वास्‍तव म भारतीय बाजार संरचनात्‍मक तौर पर मजबूत है.

मौजूदा वैश्विक बाजारों की तुलना में भारतीय बाजार की स्थिति तो हम सब समझते ही हैं, अब बात करते हैं कि ऐसे बाजार परिस्थितियों में एक व्‍यक्तिगत निवेशक को किन बातों का ध्‍यान रखना चाहिए और अपने निवेश पोर्टफोलियो में क्‍या-क्‍या शामिल करना चाहिए. शाह ने निवेशकों को निम्‍नलिखित सुझाव दिए हैं.

डेट म्‍यूचुअल फंड में करें निवेश

डेट म्‍यूचुअल फंड्स अबतक लोकप्रिय नहीं हो पाए हैं. हालांकि, निवेश के दौरान हायर यील्ड को देखते हुए, एक एसेट क्लास के तौर पर डेट फिर से आकर्षक लग रहा है. शाह के अनुसार, रिजर्व बैंक की आगामी बैठकों में रेपो दर में बढ़ोतरी होगी क्योंकि उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें ऊंची है और इसने आरबीआई के सामने एक चुनौती खड़ी की है. इसलिए भविष्य में हाई अक्रूअल स्कीम और डायनामिक ड्यूरेशन वाली स्कीम फायदे का सौदा साबित हो सकते हैं. फ्लोटिंग रेट बांड अर्थात एफआरबी भी भविष्‍य में अच्‍छा प्रदर्शन कर सकते हैं. इनवेस्टर्स को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि डेट म्यूचुअल फंड की पोर्टफोलियो में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.

सिस्‍टेमेटिक इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान का लें सहारा

जब तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व महंगाई पर नियंत्रण के लिए सभी उपलब्‍ध विकल्‍पों का सहारा ले रहा है, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा. शाह कहते हैं कि बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए निवेशकों को आदर्श रूप से तीन से पांच साल के समय के साथ सिस्‍टेमेटिक इन्‍वेस्‍टमेंट प्‍लान (SIP) के जरिये इक्विटी म्‍यूचुअल फंडों में निवेश करना चाहिए. योजनाबद्ध, अनुशासित और व्यवस्थित तरीके से विभिन्न फाइनेंशियल गोल्‍स को प्राप्त करने के लिए बूस्टर एसआईपी, बूस्टर एसटीपी, फ्रीडम एसआईपी या फ्रीडम एसडब्ल्यूपी जैसी फीचर्स पर भी विचार किया जा सकता है.

गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ करें पोर्टफोलियो में शामिल

एक डायवर्सिफायड पोर्टफोलिया में निवेश से जुड़ा जोखिम कम हो जाता है. डायवर्सिफायड पोर्टफोलियो यह सुनिश्चित करता है किकंसेन्‍ट्रेशन रिस्‍क (Concentration Risk) को कम किया जाए. अनिश्चितता को देखते हुए सोना और चांदी निवेश के अच्‍छे विकल्‍प हो सकते हैं. शाह कहते हैं कि ये न सिर्फ महंगाई के खिलाफ, बल्कि रुपये के अवमूल्‍यन (Currency Depreciation) से भी बचाव के निवेशकों को क्या जानना चाहिए रूप में काम करते हैं. निवेश गोल्‍ड और सिल्‍वर में में ईटीएफ (Exchange Traded Funds) के जरिये निवेश करने पर विचार कर सकते हैं. जिनके पास डीमैट खाता नहीं है, उनके लिए गोल्ड या सिल्वर फंड ऑफ फंड्स निवेश का एक विकल्‍प हो सकता है.

Published at : 14 Nov 2022 11:52 AM (IST) Tags: Debt Mutual Funds systematic investment plan Gold ETF investment strategy Volatile Market Nimesh Shah हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: Business News in Hindi

LIC Scheme: एलआईसी की इस स्कीम में 200 के निवेश पर मिलेंगे 28 लाख रुपये, जानें डिटेल

LIC Scheme, LIC Jeevan Pragati Plan

सुरक्षित इन्वेस्टमेंट के लिए एलआईसी की पॉलिसी सबसे बढ़िया ऑप्शन है. इस लेख में हम आपको बताएंगे एलआईसी की एक धांसू स्कीम के बारे में, जिसमें आपको बढ़िया मुनाफा मिलेगा.

LIC Plan Policy: एलआईसी अपने ग्राहकों के लिए कई शानदार प्लान पेश करती है. इस कड़ी में हम आपको भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC Plan) की एक शानदार प्लान के बारे में जानकारी देंगे. सुरक्षित इन्वेस्टमेंट के लिए एलआईसी की पॉलिसी सबसे बढ़िया ऑप्शन है. यदि आप नव वर्ष में किसी योजना में निवेश करने की सोच रहे हैं तो इसके लिए एलआईसी आपके लिए बढ़िया ऑप्शन है. इस लेख में हम आपको बताएंगे एलआईसी की एक धांसू स्कीम (LIC Scheme) के बारे में, जिसमें आपको बढ़िया मुनाफा मिलेगा. तो चलिए हम आपको यहां पर एलआईसी की इस स्कीम की खासियत के बारे में बताएंगे.

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण के नियमों का पालन करने वाली खास पॉलिसी का नाम है- एलआईसी जीवन प्रगति प्लान (LIC Jeevan Pragati Plan). इस पॉलिसी में रिस्क कवर मिलता है. इसके अलावा आपको डेथ बेनिफिट भी मिलेगा. जो प्रत्येक 5 वर्ष की अवधि पर बढ़ता है. रकम इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी पॉलिसी कब से एक्टिव है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एलआईसी की इस पॉलिसी को 12 वर्ष की उम्र से शुरू किया जा सकता है. आपको इस योजना में 20 साल तक इन्वेस्टमेंट करना होगा. इसमें आपको प्रत्येक दिन 200 रुपये हर दिन के हिसाब से निवेश करना होगा. इस योजना में आपकी अधिकतम उम्र 45 साल है.

जानें पॉलिसी की खासियत

-पांच वर्ष तक निवेशक की मृत्यु होने पर बेसिक सम अश्योर्ड (मूल बीमित रकम) का 100 फीसदी भुगतान होगा.

-इस पॉलिसी में 6 साल से 10 साल के बीच में निवेशक की मौत हो जाने पर 125 प्रतिशत , 11 से 15 साल के बीच 150 प्रतिशत और 16 से 20 साल के बीच 200 प्रतिशत का भुगतान होगा.

-दुर्घटना लाभ और दिव्यांगता राइडर का लाभ भी मिलेगा.

- जीवन प्रगति प्लान मैच्योर स्कीम होने पर पॉलिसीधारक को 28 लाख रुपये मिलेंगे.

Stock Market में बड़ी गिरावट निवेशकों के लिए मौका, इन म्यूचलफंड में लगाएं पैसा

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स्टॉक मार्केट (Stock Market) की गिरावट ने साल के अंत में निवेशकों को बड़ा नुकसान कराया है. बीते एक सप्ताह में इंवेस्टर्स को करीब 19 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है. ट्रेडर से लेकर इन्वेस्टर्स हर वर्ग को इसका भारी नुकसान हुआ है. उनकी दौलत इस गिरावट के कारण घट गई है. म्यूचुअल फंड और एसआईपी (Mutual Fund & SIP) की सहायता से निवेश करने वाले निवेशकों के पोर्टफोलियो पर भी बड़ी चोट लगी है. इसके जानकारों का कहना है कि मौजूदा मंदी का लंबी अवधि के म्यूचुअल फंड एसआईपी निवेशकों पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ेगा. अब निवेशकों के लिए मौके की तलाश है.

विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक म्यूचुअल फंड की मदद से शेयर बाजार में कई अवसर तलाश रहे हैं. बाजार में आई इस गिरावट का निवेशक लाभ उठा सकते हैं. इंस्टवेस्टर के लिए यह बेहतरीन अवसर हैं. ये कई तरह के फंड्स के जरिए इन्वेस्टमेंट की सलाह दे रहे हैं.

इस म्यूचुअल फंड में करें निवेश

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि वे नए निवेशक जो बाजार के बढ़ने का इंतजार कर रहे थे, उनके पास हाईब्रिड रूट या बैलेंस्ड एडवांटेज फंड की मदद से निवेश करने का बेहतर मौका है. हाइब्रिड फंड बाजार को समय प्रदान करने की कोशिश करते हैं. नए-नए निवेशकों को एक निवेशकों को क्या जानना चाहिए बार में पैसा लगाने से बचना चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को हिदायत दी जाती है कि हाइब्रिड म्यूचुअल फंड में पैसे को 6-12 हिस्सों में बांटकर निवेश करना चाहिए.

एक रिपोर्ट के अनुसार, नए निवेशकों का कहना है कि गिरते बाजार में नए निवेशकों के लिए हाइब्रिड फंड सही साबित हो सकता है? उनका कहना है कि लोगों को अब लंबी अवधि के निवेश को लेकर तैयार रहना चाहिए. इसके लिए हाइब्रिड फंड सबसे अच्छा है.

लंबी अवधि में बनेगा पैसा

विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि के म्यूचुअल फंड को चुनना चाहिए. इसके साथ एसआईपी निवेशकों को अपने निवेश को जारी रखने की आवश्यकता है. यह मध्यम से लंबी दूरी के लिए लक्ष्य को पूरा करने का बेहतर मौका है. हाइब्रिड म्यूचुअल फंडों में निवेश की सलाह दी जाती है. नए निवेशक के लिए बेहतर मौका है.

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